नारायण कवच
Narayan Kawach #narayankavach जो नारायण कवच धारण करता है, ऐसा आदमी अगर किसी को छु दे तो उसका भी मंगल होता है | नारायण कवच की ऐसी बड़ी भारी महिमा है | श्रीमदभागवत में नारायण कवच लम्बी चौड़ी विधि से भी किया जा सकता है और आज कल वो विधि करने की क्षमता न हो तो ऐसे ही भावना से भी किया जा सकता है | मेरे अंग प्रति अंग में भगवान नारायण का निवास है, मेरे मन और बुद्धि की भगवान नारायण रक्षा करें, मुझे पाप कर्म में गिरने से नारायण बचाये, मुझे अशांति और दुखों से नारायण बचाये | नर और नारी में बसे हुए हम नारायण चैतन्य आत्मा का आवाहन करते, प्रागट्य चाहते है | श्रीमदभागवत में इन्द्र जब प्रभाव हीन हो जाता है गुरु का अनादर करने से, दैत्य ने इन्द्र पर धावा बोल दिया और देवता लोग दर दर की ठोकरे खाने लगे, इन्द्र प्रभाव हीन होकर भटकने लगा और भगवान ब्रह्माजी की स्तुति करने को पंहुचा | कथा ऐसी आती है की एक बार इन्द्र अपनी विजय की खुशी में राज सिंहासन पर बैठा था इन्द्राणी के साथ, देवता लोग अभिवादन करके ही बैठे थे | मनुष्य निगुरा हो, धन संपत्ति बढ़ जाये, एश्वर्य बढ़ जाये, विवेक न हो, तो एश्वर्य का मद भी आता है...